पाठ्यक्रम: GS2/ स्वास्थ्य
संदर्भ
- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 की अनुसूची K से सिरप शब्द को हटा दिया है। इसके परिणामस्वरूप अब खाँसी की दवाओं (कफ सिरप) की बिक्री केवल चिकित्सकीय पर्चे के आधार पर ही की जा सकेगी।
पृष्ठभूमि
- यह कदम वर्ष 2022 के बाद विभिन्न देशों में बच्चों सहित अनेक लोगों की मृत्यु की घटनाओं के मद्देनज़र उठाया गया है, जिनका कारण औद्योगिक विलायकों से मिलावटी कफ सिरप पाए गए थे।
- इस निर्णय ने औषधि नियमन, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासन तथा वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में भारत की भूमिका से संबंधित अनेक चिंताओं को पुनः उजागर किया है।
भारत का औषधि क्षेत्र
- भारत को विश्व की “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाता है, क्योंकि यहाँ सस्ती कीमतों और गुणवत्तापूर्ण औषधियों का अद्वितीय संयोजन उपलब्ध है, जिसने भारतीय दवाओं को वैश्विक बाजारों में व्यापक स्वीकृति दिलाई है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर संयुक्त राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) द्वारा अनुमोदित विनिर्माण संयंत्रों की सर्वाधिक संख्या भारत में स्थित है, जो भारतीय औषधियों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा के प्रति अंतरराष्ट्रीय विश्वास को सुदृढ़ करती है।
- भारत में लगभग 500 सक्रिय औषधीय संघटक निर्माता कार्यरत हैं, जो वैश्विक API उद्योग का लगभग 8 प्रतिशत योगदान करते हैं।

भारत के औषधि नियामकीय तंत्र से संबंधित प्रमुख चिंताएँ
- विनिर्माण गुणवत्ता संबंधी चिंताएँ: औषधियों में संदूषण तथा गुणवत्ता संबंधी कमियों की घटनाएँ समय-समय पर सामने आती रही हैं, जो विनिर्माण मानकों के अनुपालन में विद्यमान कमजोरियों को दर्शाती हैं।
- खंडित नियामकीय पर्यवेक्षण: विभिन्न नियामकीय प्राधिकरणों तथा उनके भिन्न-भिन्न प्रवर्तन मानकों के कारण निगरानी एवं नियंत्रण में असंगतियाँ उत्पन्न होती हैं।
- बिना चिकित्सकीय परामर्श के औषधि उपयोग की प्रवृत्ति: भारत में स्व-औषधोपचार की व्यापक प्रवृत्ति दवाओं के अविवेकपूर्ण एवं असुरक्षित उपयोग के जोखिम को बढ़ाती है।
- नियामकीय क्षमता संबंधी सीमाएँ: भारत में औषधि नियमन संघ एवं राज्य सरकारों की साझा जिम्मेदारी है।
- कई राज्यों के औषधि नियंत्रण विभाग निम्नलिखित संसाधनों की कमी का सामना कर रहे हैं—
- औषधि निरीक्षक
- परीक्षण प्रयोगशालाएँ
- तकनीकी विशेषज्ञ एवं कार्मिक
- कई राज्यों के औषधि नियंत्रण विभाग निम्नलिखित संसाधनों की कमी का सामना कर रहे हैं—
भारत में औषधियों का विनियमन
- केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन , जिसका नेतृत्व भारतीय औषधि महानियंत्रक करते हैं, देश में विपणन की जाने वाली औषधियों की गुणवत्ता के विनियमन हेतु केंद्रीय प्राधिकरण है।
- यह संस्था औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के तहत कार्य करती है।
- देश में औषधियों, प्रसाधनों तथा चिकित्सा उपकरणों के आयात, विनिर्माण, वितरण एवं बिक्री का विनियमन निम्नलिखित विधिक व्यवस्थाओं के अंतर्गत किया जाता है—
- औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940
- औषधि नियम, 1945
- चिकित्सा उपकरण नियम, 2017
- नवीन औषधि एवं नैदानिक परीक्षण नियम, 2019
- प्रसाधन सामग्री नियम, 2020
- राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण: राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण को औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के अंतर्गत औषधियों की कीमतें निर्धारित एवं संशोधित करने का दायित्व सौंपा गया है।
- मुख्य कार्य:
- औषधियों की कीमतों का निर्धारण एवं संशोधन
- मूल्य नियंत्रण आदेशों के अनुपालन की निगरानी
- आवश्यक औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना
- औषधि नीति संबंधी सलाह प्रदान करना
- मुख्य कार्य:
- भारतीय औषधसंग्रह आयोग (IPC): भारतीय औषधसंग्रह आयोग भारतीय औषधसंग्रह के नियमित प्रकाशन की निगरानी करता है, जो औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अंतर्गत औषधि मानकों का आधिकारिक संकलन है।
- भारतीय औषधसंग्रह की भूमिका: यह भारत में विपणन की जाने वाली औषधियों के लिए निम्नलिखित मानक निर्धारित करता है—
- पहचान
- शुद्धता
- सामर्थ्य/प्रभावकारिता
- भारतीय औषधसंग्रह की भूमिका: यह भारत में विपणन की जाने वाली औषधियों के लिए निम्नलिखित मानक निर्धारित करता है—
- राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण (SLAs): औषधियों के विनिर्माण, बिक्री एवं वितरण पर नियामकीय नियंत्रण राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों के माध्यम से लाइसेंसिंग एवं निरीक्षण प्रणाली द्वारा किया जाता है।
- इसके विपरीत, देश में आयातित औषधियों पर नियामकीय नियंत्रण केंद्रीय सरकार द्वारा CDSCO के माध्यम से किया जाता है।
- SHRESTH पहल: स्टेट हेल्थ रेगुलेटरी एक्सीलेंस इंडेक्स एक अभिनव राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य पारदर्शी एवं डेटा-आधारित ढाँचे के माध्यम से राज्य स्तरीय औषधि नियामकीय प्रणालियों का मूल्यांकन एवं सुदृढ़ीकरण करना है।
आगे की राह
- गुणवत्ता नियंत्रण को केवल अंतिम उत्पाद के परीक्षण तक सीमित रखने के बजाय संपूर्ण विनिर्माण प्रक्रिया में समाहित किया जाना चाहिए।
- निरीक्षण रिपोर्टों तथा नियामकीय कार्रवाई से संबंधित निष्कर्षों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
- नियामकीय पर्यवेक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए निम्नलिखित आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए—
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता
- डेटा विश्लेषण
- डिजिटल ट्रैकिंग एवं निगरानी प्रणाली
औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 की अनुसूची K
- अनुसूची K में उन विशिष्ट औषधियों की सूची सम्मिलित है जिन्हें निर्धारित शर्तों के अधीन औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 के कुछ प्रावधानों से छूट प्रदान की गई है
- इसका उद्देश्य उन औषधियों की बिक्री एवं वितरण को सुगम बनाना है, जिनके लिए कठोर लाइसेंसिंग आवश्यकताओं को अनिवार्य नहीं माना जाता।
Source: TH